Site icon thenewsnetic.com

हम वो मुसाफिर है |

हम वो मुसाफिर है |

जाना कही और था,

बीच मे वापसी आ गए,

अब हम तालमेल बैठा नहीं पाए,

खुद से ज्यादा कैसे बताये

हमसे ज्यादा हमको

कोई नहीं जानता,

किश्तिया भी किनारे पर ही थी,

पर ज़ब तक सफर फिर शुरू करते,

हवाओ के रुख ने रोक लिया,

कुछ बाकि बकाया रह गया है,

बगैर वसूले मत जाओ,

अभी वसूली हो रही है,

हमने सब्र कर लिया ,वसूली बहुत है,

अब आगे सफर मे बोझ नहीं ले जाना,

पर अब नहीं जान पा रहे है,

सफर तो फिर शुरू किया,

फिर मेरी कस्ती क्यों डुबो दी गई,

नये सफर पर निकलने पर ,

नई कस्ती कहा से ला पाएंगे 

जाना कही और था,

बीच मे वापसी आ गए,

अब हम तालमेल बैठा नहीं पाए,

खुद से ज्यादा कैसे बताये

हमसे ज्यादा हमको

कोई नहीं जानता,

किश्तिया भी किनारे पर ही थी,

पर ज़ब तक सफर फिर शुरू करते,

हवाओ के रुख ने रोक लिया,

कुछ बाकि बकाया रह गया है,

बगैर वसूले मत जाओ,

अभी वसूली हो रही है,

हमने सब्र कर लिया ,वसूली बहुत है,

अब आगे सफर मे बोझ नहीं ले जाना,

पर अब नहीं जान पा रहे है,

सफर तो फिर शुरू किया,

फिर मेरी कस्ती क्यों डुबो दी गई,

नये सफर पर निकलने पर ,

नई कस्ती कहा से ला पाएंगे,

लेखिका :कंचन ठाकुर

Exit mobile version