ऋषभ बहुत परेशान हो रहा था। वह जल्दी जल्दी सामान पैक करके पृथ्वी जाने की तैयारी कर रहा था। जिस तेजी से आधुनिक परिवर्तन ,नए -नए ग्रहो की खोज ,की जा रही थी। और लगातार प्रयास बना रहा ,वही पर मंगल ग्रह को अत्यधिक आधुनिक यंत्रो से तो पूरा बसा दिया गया ,भूतकाल मे जैसे कुछ वर्षो से बहुत बड़ी संख्या मे लोगो का गाँवो से शहरों की तरफ पलायन किया गया। लोगो ने अब पृथ्वी से मंगल ग्रह की तरफ पलायन किया है। कर्म भूमि जन्म भूमि से ज्यादा हावी थी। पृथ्वी का विरान पन का डर ,उसे सता रहा था। ऋषभ की बेचैनी बढ़ती जा रही थी ,तभी घड़ी का अलार्म बज उठा। ऋषभ की भविष्य मे नहीं ,वर्तमान मे नींद खुल गई।
Author: Kanchan Thakur