क्या हक और अधिकार माँगने का तरीका यही है।
आज देश मे हर जगह स्थिति खराब हो रही है। हर जगह जिसे देखो आये दिन कोई मुद्दा लेकर सड़को पर उतर रहा है। ऐसा लगता है राजनिति सड़को पर उतर आई है , मुद्दाअलग हो गया। विपक्ष देश मे हुड़दंगबाजी करके आंदोलन करने का एक नया तरीका निकाला है। क्या हक और अधिकार मांगने का तरीका सही है। लोकतंत्र मे सबको अपनी बात रखने का हक है। पर वो लोग कहा है ? जिनका वोटर लिस्ट से नाम हटा है। वो लोग आगे क्यों नहीं आ रहे है? आवाज उठाने की जरूरत आज ही क्यों है ? प्रोटेस्ट मे मुद्दे आज ही क्यों उठाया जा रहा है ? ईद औरं क्रिसमस पर करके दिखाओ। ये मुद्दे उस दिन भी उठाया जा सकता है । शक्ति की देवी माँ के नवरात्री के दिन चल रहे है। जो लोग दर्शन के लिए मंदिर जाना चाहते है। वे लोग मंदिर नहीं जा पा रहे है। हिन्दू मंदिर के बहार ही पत्थर बाजी क्यों हो रही है। वही बगल और भी धर्मस्थल है। वहाँ क्यों नहीं हो रहे है। क्यों हिन्दुओ के त्यौहार के समय ही सारी समस्या याद आ जाती है ? उसी समय ही सारे कानून समाज की व्यवस्था व अधिकारो की बात क्यों होती है। प्रोटेस्ट के नाम प्रधानमंत्री जी को गंदे शब्द इस्तेमाल किये जा रहे है। एक 75 वर्षीय सीनियर जो देश का सर्वोच्च, गरिमा व सम्मानिय व्यक्ति है । उस पद का सम्मान तो किया जा सकता है। गालिया व फबतिया देते हुए आप लोग सड़को पर उतर आये है। जाइये संसद मे बैठो ,वहा बहस करो। ये मुद्दे संसद मे क्यों नहीं उठाय जाते है ?
आपकी सुरक्षा के लिए जो देश की पुलिस की जो गरिमा है। पुलिस क़ो भी नहीं छोड़ रहे हो। उनको गालिया गंदे गंदे फबतिया कस रहे हो। उनके परिवारों क़ो गालिया दे रहो हो। पुलिस विभाग की छवि क्यों खराब की जा रही है ?ये नौकरी सम्मानीय नौकरी है। इस छवि के कारण आगे कोई पुलिस की नौकरी करना भी नहीं चाहेगा। आप भविष्य मे पुलिस कहा से लाएंगे ? पुलिस विभाग पर आरोप लगा रहे है। बच्चों को जो माइनर है , उनको मारा जा रहा है। इस प्रोटेक्शन मे बच्चे क्या कर रहे है ? इनके माँ बाप कहा है ? ये हुड़दंगबाजी करने बाहर क्यों गए ? ये प्रोटेक्शन के बहाने राजनिति क्यों खेली जा रही है ? महिलाओ बच्चों क़ो आगे करके उनकी आड़ मे गन्दा खेल क्यों खेला जा रहा है ? आप बार बार कभी किसी का कभी किसी का इस्तीफा क्यों माँग रहे है ? एक बार लिस्ट बना लो, एक बार ही मांग लो सबका। क्योंकि आप लोगो मे कुछ लोगो क़ो राजनीती मे जगह बनानी है। प्रदर्शन के नाम पर सब जगह बंद कर रहे हो। या ये कहे ,कि आंदोलनकारियो को अपना वर्चस्व व पहचान बनाने की होड़ बन गई है।
इस तरह राजनिति करने से आम जनता क़ो समस्या हो रही है। देश की सर्वजानिक सम्पति का नुकसान हो रहा है। जो देश की आम जनता के टैक्स से बना है। चुनाव आयोग के खिलाफ सड़क पर विपक्ष उतरा है। जब कांग्रेस 2014 मे चुनाव हारी थी। उस समय चुनाव आयोग पर उनका अधिकार था। तब क्यों नहीं इस्तीफा माँगा था ?
यह भी ठीक है ,सरकार मे त्रुटिया है। पर हुड़दंगबाजी करके समस्या का हल नहीं निकल सकता है। ये मुद्दे सांसद मे क्यों नहीं उठाये जाते है। सड़को पर आने से समस्या का हल थोड़ी निकल जायेगा। और रही बात अधिकारों की तो कुछ अधिकार व कर्तव्य जनता के भी होते है। आप हक़ की बात करते हो। आपको अपना हक़ पता है। मंदिर के बाहर जो कूड़ा कचड़ा फैलाया है। ये किसका काम है। अगर हक की बात करनी है। तो शुरुआत अपने घर से करो, अपने आस पड़ोस से स्टार्ट करो। हर कोई दूसरे पर आरोप लगा कर मनमानी कर रहा है। किसी मे शिस्टाचार तो है, ही नहीं। जिसे देखो वह अपने आप को अनैतिक कार्यों से जोड़ रखा है। पहले समाज मे सुधार करो, यही समाज से ही निकल कर ही लोग राजनीती मे आते है। ज़ब समाज सुधरेगा ,तो हर विभाग अपने आप ठीक हो जायेगा।
लेखिका : कंचन ठाकुर
टीवी व अन्य लोगो से मिली जानकारी

