कलुवा बंदर और उल्लू राठी
एक बार कहीं से नंदनवन में एक कलुआ नाम का बंदर आ गया था। वह बहुत शरारती था। पूरे जंगल में उसने आतंक मचा रखा था। भोलू जिराफ ने जंगल वन की कमेटी में शिकायत किया। उल्लू ब्लॉक से उल्लू राठी अपनी कमेटी की गाड़ी लेकर जंगल में आ गया। उसने कलुआ बंदर पकड़ने वाले पिंजरे को खोल दिया। और उसमें एक केला अटका दिया,अब कलुआ बंदर केले को देखकर लालच में आ गया और केले को लेने के लिए पिंजरे के अंदर हाथ किया। तभी दरवाजा जल्दी से बंद हो गया। अब कलुआ बंदर दर्द के मारे चिल्लाने लगा। उल्लू ब्लॉक से आया उल्लू राठी कहीं सिगरेट पीने के लिए चला गया था। उसे मालूम नहीं था की बंदर कलुआ उसमें फंस चुका है। तभी पेड़ पर बैठे काकू कौवे ने कहा कि तुम्हारे लालच की वजह से तुम इस पिंजरे में फंस गए हो। तो कलुआ बंदर बोला तो मैं अब कैसे बचाऊं अपने आपको काकू कौवे ने कहा, तुम्हें केले को छोड़ना होगा। तब तुम्हारा हाथ बाहर आ पाएगा। पर कलुआ बंदर केले को छोड़ना नहीं चाह रहा था। और केले के साथ हाथ को बाहर निकालने की बहुत कोशिश कर रहा था आखिर में कलुआ बंदर हार गया और उसे काकू कौवे की बात सही लगी उसने केले को छोड़ दिया। केले को छोड़ते ही अब उसका हाथ ढीला हो गया और आसानी से उसका हाथ बाहर आ गया। अब उसको समझ में आ गई थी कि लालच करना बुरी भला है। और उसने उसी दिन से जंगल में शरारत करना छोड़ दिया। तभी वहाँ पर उल्लू ब्लॉक का उल्लू राठी आ गया उसने देखा की काम के बीच में काम को छोड़कर जाना उसके लिए महंगा पड़ा तभी उसका बॉस ऊदबिलाव राठी भी आ गया। ऊदबिलाव राठी उल्लू ब्लॉक उल्लू को डाटने लगा उल्लू ब्लॉक का उल्लू राठी अपने बॉस ऊदबिलाव राठी से माफी मांगी और कहां आगे से मैं काम के बीच में छोड़कर सिगरेट पीने नहीं जाऊंगा। फिर उसके बॉस ऊदबिलाव राठी ने उसको माफ कर दिया।

